शायद कभी सुनहरा आफ़ताब आएगा |
शायद कभी सुनहरा आफ़ताब आएगा |
तेज़ बदलती इस दुनिया में वक़्त कहाँ,
कि सोचूँ कहाँ जा रहा हूँ ?
मैं जी रहा हूँ, या पल पल मर रहा हूँ;
खुद घुट रहा हूँ, या औरों का गला घोंट रहा हूँ ?
पर क्या मेरे सोचने से,
इस बनावटी दुनिया में कोई हकीक़त लाएगा ?
शायद कभी सुनहरा आफ़ताब आएगा |
वो हिन्दू है, मैं मुसलमान हूँ,
मैं हिन्दू हूँ, वो मुसलमान है |
वो जानवर है, मैं इंसान हूँ,
मैं जानवर हूँ, वो इंसान है |
बहुत हो चुकी रंजिश; थक गया हूँ मैं |
अब बदलना चाहता हूँ ;
पर क्या मेरे बदलने से बदलाव आएगा ?
शायद कभी सुनहरा आफ़ताब आएगा |
मैंने मारा है, मैंने लूटा है;
इन्हीं हाथों से गला काटा है |
मैं गुनहगार हूँ , खलनायक हूँ;
मुझे क्षमा न करो, मैं घृणा के ही लायक हूँ |
अब मुझे मौत चाहिए, मरे हुओं के लिए इन्साफ चाहिए;
पर मेरे मरने से, क्या इस मर चुकी सभ्यता का नया आगाज़ आएगा?
शायद कभी सुनहरा आफ़ताब आएगा |
तू भी तो इस सब से दूर नहीं था,
गुनाह करने में किसी से कम नहीं था |
हमारे मुक़द्दर के ओ सिकंदर,
तेरे कहने पर ही तो यलगार हुआ था !
बेशक तू चुन लिया जायेगा,
अपने प्यादों का मसीहा बन जायेगा ;
पर क्या तेरी हुकूमत में कभी रामराज आएगा ?
शायद कभी सुनहरा आफ़ताब आएगा |
अब मैं भी बस करता हूँ ;
क्यों तुम बहरों के बीच फिजूल आवाज़ करता हूँ ?
मेरा मुस्तकबिल जैसा भी होगा, मेरा होगा ;
पर यकीन है मुझे, इस पागल रात का संजीदा सवेरा होगा |
सच कहूँ तो इस पागलपन का हिसाब ज़रूर आएगा;
यकीन है मुझे, एक सुनहरा आफ़ताब ज़रूर आएगा |
N.B: आफ़ताब – Sun / मुस्तकबिल – Future / रंजिश – animosity / आगाज़ – beginning / यलगार – assault
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Tags: Creativity, hindi, poem, Poetry, Urdu



Nice way to express your anguish..
great job… I am positive ” sunhara aaftab ayega”
मिर्ची, ये मिर्ची
कमाल कर गयी
धोती को फाड़ के
रुमाल कर गयी
Some very beautifully worded & crafted lines…
Kudos… “ik sunhara aaftab zaroor ayega”
@ Lalit – Thanks
@ Ludwig – Something is coming.